बुधवार, 30 जनवरी 2008

बापू के देश में

आज बापू को गुज़रे हुए पूरे साठ बरस हो गए हैं। आज जब पूरी दुनिया में गाँधी के आदर्शों को अपनाने की बात हो रही है तो अपने खुद के देश में गाँधी अप्रासंगिक होते जा रहे हैं। गाँधी जयंती और आज के दिन बापू को याद करना महज़ रस्म अदायगी से ज्यादा और कुछ नही रह गया है। राज कुमार हिरानी और विधु विनोद चोपडा जब गाँधी को में रखकर लगे रहो मुन्ना भाई जैसी फिल्म बनाते हैं तब पूरे देश में गांधीगिरी की लहर दौड़ जाती है। नहीं तो फिर वही कहानी। लोग उन नोटों के पीछे ज़रूर पागलों की तरह दौडे जा रहे हैं जिन पर गाँधी की तस्वीर छपी हुई है। लेकिन जब गाँधी के आदर्शों को अपनाने की बात होती है तो उनको वर्त्तमान परिप्रेक्ष्य में अव्यवहारिक बताया जाता है। गाँधी जी कि ६० वीं पुण्य तिथि पे सलाम इंडिया का बापू को सलाम।

कोई टिप्पणी नहीं: